पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खतरनाक करार दिया है। ममता ने गुरुवार को कृष्णानगर की रैली में कहा कि शाह की आंखों में दहशत है। उनकी एक आंख में आपको दुर्योधन तो दूसरी आंख में दुशासन दिखाई देगा।
ममता ने स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR यानी वोटर वेरिफिकेशन) को लेकर महिलाओं से कहा- वे (केंद्र सरकार) SIR के नाम पर मांओं-बहनों के अधिकार छीन लेंगे। वे चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस बुलाएंगे।
ममता ने महिलाओं से ये भी कहा- अगर आपके नाम काटे गए तो आपके पास किचन के बर्तन हैं, इनसे लड़िए। अपने नाम को लिस्ट से कटने मत देना। महिलाएं आगे आकर लड़ेंगी, पुरुष इनके पीछे रहेंगे।
ममता ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले SIR को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। अमित शाह वोटों के इतने भूखे हैं कि चुनाव से दो महीने पहले ही यह प्रक्रिया चला रहे हैं।
ममता ने रैली में ये भी कहा कि अक्टूबर से 12 राज्यों में SIR चल रहा है। इस प्रक्रिया का मकसद गलत मतदाता का नाम हटाना और नए मतदाता जोड़ना है। यह बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए हो रहा है।
ममता ने केंद्र पर बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन कैंप भेजने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से बीजेपी समर्थक अफसर भेजे जा रहे हैं, जो जिलाधिकारियों की निगरानी कर रहे हैं। अगर किसी को बाहर निकाला गया, तो हम वापस लाएंगे। बंगाल का मामला अलग है।
गृह मंत्री अमित शाह ने ममता के विरोध को घुसपैठियों को बचाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि SIR से लोकतंत्र को प्रदूषित होने से बचाया जा रहा। शाह ने X पर लिखा कि कुछ दल मतदाता सूची शुद्धीकरण के खिलाफ हैं, क्योंकि उन्हें घुसपैठियों के वोट चाहिए।
ममता ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर हुए गीता पाठ कार्यक्रम के दौरान नॉनवेज बेचने वाले दो दुकानदारों पर हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, यह बंगाल है, यूपी नहीं, यहां ऐसी गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं होगी।
ममता ने बीजेपी पर राज्य में सांप्रदायिक विभाजन की संस्कृति लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- मैं सांप्रदायिक विभाजन में विश्वास नहीं करती, सभी धर्मों के साथ चलना चाहती हूं। गीता पढ़ने के लिए सार्वजनिक सभा की क्या जरूरत? जो भगवान या अल्लाह से प्रार्थना करते हैं, वे दिल से करते हैं। धर्म बांटने के लिए नहीं, जोड़ने के लिए है।


