भारतीय एयरलाइंस कंपनी एअर इंडिया की एक बार फिर बड़ी चूक सामने आई है, जिसके कारण दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर जा रही फ्लाइट AI-185 को उड़ान भरने के करीब 7 घंटे बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा।
दरअसल, एअर इंडिया ने यात्रियों को गलती से बोइंग 777-200 LR फ्लाइट में भेज दिया था, जबकि कनाडा में उसे केवल बोइंग 777-300 ER भेजने की इजाजत है।
एविएशन नियमों के तहत अलग-अलग देशों में अलग-अलग विमान मॉडल के लिए इजाजत होती है। कनाडा ने एअर इंडिया को सिर्फ B777-300 ER के लिए मंजूरी दी है, न कि LR वर्जन के लिए।
गलती का पता तब चला जब विमान करीब 4 घंटे उड़ान भरकर चीन के कुनमिंग एयरस्पेस में पहुंच चुका था। इसके बाद तुरंत विमान को वापस बुला लिया गया।
एअर इंडिया ने इस घटना को ऑपरेशनल इश्यू बताया और कहा कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं। यात्रियों को होटल की सुविधा दी गई और उन्हें अगली सुबह यानी 20 मार्च को दूसरी फ्लाइट से वैंकूवर के लिए रवाना किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, इस गलती को गंभीरता से लिया गया है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। जानकारी के अनुसार, एक बोइंग 777 विमान हर घंटे करीब 8-9 टन फ्यूल खर्च करता है, ऐसे में यह गलती एयरलाइन के लिए काफी महंगी साबित हुई है।
बोइंग 777 जैसे बड़े विमान के लिए, 8 टन (8,000 किलोग्राम) जेट ईंधन की कीमत मौजूदा दरों के आधार पर लगभग ₹7 लाख से ₹9 लाख के बीच हो सकती है। ऐसे में 7 घंटे हवा में रहने के दौरान एअर इंडिया फ्लाइट में करीब 60 लाख रुपए का फ्यूल खर्च हुआ।
इधर एअर इंडिया की न्यूयॉर्क से मुंबई आ रही फ्लाइट AI-116 को गुरुवार दोपहर सऊदी अरब के मदीना में डायवर्ट करना पड़ा। कॉकपिट में कार्गो सेक्शन में आग लगने का अलर्ट मिलने के बाद एहतियातन यह फैसला लिया गया।
एयरलाइन के मुताबिक, बोइंग 777 विमान ने मदीना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। हालांकि, लैंडिंग के बाद की जांच में यह अलर्ट गलत निकला और किसी तरह की आग नहीं पाई गई। जांच पूरी होने के बाद विमान को दोबारा ऑपरेशन के लिए क्लियर कर दिया गया।
यह फ्लाइट मुंबई के लिए रवाना हो गई। एअर इंडिया ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।
भारत के नागरिक उड्डयन नियामक (DGCA) ने 13 फरवरी को बताया था कि उसने एअर इंडिया पर 1.10 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई एक एयरबस विमान को बिना ‘एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट’ (विमानल उड़ाए जाने योग्य है या फिटनेस सर्टिफिकेट) के 8 बार उड़ाए जाने के कारण की गई।
DGCA ने एक गोपनीय आदेश में कहा कि इस चूक से देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन पर जनता का भरोसा और कम हुआ है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार मामला 26 नवंबर 2025 का है, जब एअर इंडिया ने खुद DGCA को इस चूक की जानकारी दी थी।
कंपनी ने बताया था कि उनके एक एयरबस A320 नियो विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका था। फिर भी उसे 24 और 25 नवंबर को 8 रेवेन्यू सेक्टर्स (व्यावसायिक उड़ानों) में इस्तेमाल किया गया। इसके बाद 2 दिसंबर को DGCA ने मामले की जांच शुरू की थी।


