बल्लभगढ़। बल्लभगढ़ प्रेस क्लब द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के द्वितीय दिवस पर श्री सियाराम हनुमान मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि की महिमा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कथा में शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा का वाचन करते हुए व्यास पीठ से बाबा बवंडर महाराज ने राजा परीक्षित और श्री सुखदेव जी की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भागवत महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि अहंकार ही पतन का सबसे बड़ा कारण बनता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य सुख में रहता है तो वह भगवान को भूल जाता है, जबकि दुख ही उसे प्रभु के चरणों तक पहुंचाता है। इसलिए जीवन में हर परिस्थिति को ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार करना चाहिए।
बाबा बवंडर महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि धर्म, सत्य और सेवा ही मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने राजा परीक्षित की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि जब राजा ने ब्राह्मणों की परीक्षा लेने का प्रयास किया तो उन्हें उसके परिणामस्वरूप कठोर दंड भुगतना पड़ा। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि संतों और विद्वानों का सदैव सम्मान करना चाहिए।
कथा के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में डूबा नजर आया। श्रद्धालु भजन-कीर्तन पर झूमते दिखाई दिए और “राधे-राधे” तथा “जय श्रीराम” के जयघोषों से वातावरण गूंज उठा। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ कथा श्रवण किया। आयोजन स्थल को आकर्षक फूलों और धार्मिक सजावट से सजाया गया था, जिससे माहौल और भी आध्यात्मिक बन गया।
कार्यक्रम में दयाचंद यादव, सुरेंद्र बबली, नीरज शर्मा और शशांक जैन ने विशेष रूप से उपस्थित होकर महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं बल्लभगढ़ प्रेस क्लब की ओर से अशोक जैन, संदीप पाराशर, श्याम सुंदर मित्तल, गोपाल अरोड़ा और योगिंदर चौहान ने आए हुए अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया।
आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी विशेष व्यवस्था की गई। कथा आयोजन को सफल बनाने में अनिल गोयल, जोगिंदर गर्ग, वेद प्रकाश मंगला और राजीव गोयल का विशेष सहयोग रहा। श्रद्धालुओं ने आयोजन की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए इसे समाज में धर्म और संस्कारों को मजबूत करने वाला आयोजन बताया।
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