NCERT ने क्लास 9वीं की सोशल साइंस की किताब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और इमरजेंसी पर एक नया चैप्टर जोड़ा गया है। किताब में बताया गया है कि SIR का मुख्य कार्य मतदाता सूची को अपडेट करना, मतदाताओं का सत्यापन करना और मतदाताओं की सूची में त्रुटियां दूर करना है।
चैप्टर की मदद से छात्रों को यह भी समझाया जाएगा कि मतदाता सूची का निरीक्षण करने से चुनावी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
वहीं, किताब से संविधान की प्रस्तावना हटा दी गई है। इसके अलावा सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्दों का भी जिक्र नहीं है। किताब में अलग सेक्शन जोड़ा गया है।
यह जानकारी गुरुवार को सामने आई। किताब के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।
हालांकि, इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है, लेकिन सॉवरेन (संप्रभुता), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी), ‘सेक्युलर’ (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष), ‘डेमोक्रेटिक’ (लोकतांत्रिक) और ‘रिपब्लिक’ (गणराज्य) जैसे शब्दों के बारे में नहीं बताया गया है।
9वीं की किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार, साथ ही गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए।
पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आपातकाल के समय किए गए 42वें संविधान संशोधन (1976) के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘सेकुलर’ (पंथनिरपेक्ष), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘इंटीग्रिटी’ (अखंडता) जोड़े गए थे। इससे पहले ये संविधान में नहीं थे। लेकिन ये शब्द अभी भी संविधान में मौजूद हैं।


