मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे के चलते कार्यवाही नहीं चल पाई। लोकसभा और राज्यसभा को छह बार स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसद नीट पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर चर्चा की मांग कर रहे थे। कुछ सांसद पोस्टर-बैनर लेकर सदन के अंदर आए।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर चर्चा की। खड़गे ने कहा- जंतर-मंतर पर बच्चे इकठ्ठा हुए, उनकी आवाज को दबाया जा रहा। सरकार ने उन पर लाठीचार्ज किया।
उधर हंगामे के बीच लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पेश किया।
दिन में सबसे पहले मोदी ने संसद के हंस द्वार पर मीडिया को 15 मिनट संबोधित किया। पीएम ने कहा- मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं। संसद में तर्क के साथ चर्चा हो।
लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक पेश, 2026 पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) की जाएगी। यह बिल मई में जारी ऑर्डिनेंस की जगह लेगा।
ऑर्डिनेंस लागू होने के बाद बढ़ी हुई स्वीकृत संख्या के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जज नियुक्त किए जा चुके हैं। इस संशोधन के लिए संविधान में बदलाव की जरूरत नहीं है। इसे पारित करने के लिए संसद में साधारण बहुमत चाहिए।
जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता, तब सरकार तत्काल कानून बनाने के लिए ऑर्डिनेंस या अध्यादेश जारी कर सकती है। लेकिन संसद का सत्र शुरू होने के बाद उसे 6 सप्ताह (42 दिन) के भीतर दोनों सदनों से पारित कराना जरूरी होता है, अन्यथा ऑर्डिनेंस अपने आप ही समाप्त माना जाता है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, हम सभी शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा की मांग कर रहे हैं। शिक्षा नीति में कई गंभीर समस्याएं हैं, लेकिन सरकार इस पर चर्चा करने को तैयार नहीं है। इसके बजाय छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं और उनकी पिटाई की जा रही है। आखिर क्यों? वे हमारे ही बच्चे हैं।
लोकसभा की कार्यवाही 11 बजे शुरू हुई। सदन करीब 7-8 मिनट चला। विपक्ष के हंगामे के चलते स्पीकर ने कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। इसके बाद चार बार और सदन को स्थगित करना पड़ा। उधर राज्यसभा पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, यह सरकार जनता के मुद्दों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है। NEET और CBSE परीक्षा पेपर लीक से देशभर के परिवारों में दर्द और चिंता है। माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हैं। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और NEET व CBSE परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक रोकने के उपाय तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने पर संसद में विस्तृत चर्चा हो। इस पूरे मामले में धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं, लेकिन सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं है। लोकसभा अध्यक्ष भी हमें इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।


