पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को बजट चर्चा के दौरान हंगामा हुआ। TMC विधायक कुणाल घोष को मार्शलों ने उठाकर सदन के बाहर निकाल दिया।
कुणाल घोष ने TMC के बागी गुट के विधायक अखरुज्जमां का भाषण शुरू होते ही विरोध किया। वे अपनी सीट छोड़कर उनके सामने पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इससे अखरुज्जमां अपना भाषण नहीं दे सके। सदन में शोर-शराबा और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई।
स्पीकर बिमान बनर्जी ने कई बार उन्हें अपनी सीट पर लौटने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने नहीं माना। इसके बाद स्पीकर ने सादन के बाहर करवा दिया और पूरे दिन के लिए निलंबित कर दिया।
इससे एक दिन पहले भी विधानसभा में विपक्ष की ओर से बोलने वाले सदस्यों की लिस्ट को लेकर विवाद हुआ था। इस घटनाक्रम ने टीएमसी विधायक दल के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट और सदन में बोलने वाले सदस्यों के चयन को लेकर चल रही खींचतान को फिर सामने ला दिया। कुणाल घोष को बाहर निकाले जाने के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।
3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। TMC के 80 में से 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया था।
इसमें मांग की गई थी कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी थी। 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था।
टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं।
विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। इसमें से 59 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 21 विधायक बचे हैं।
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के साउथ 24 परगना के अमतला में स्थित पार्टी ऑफिस को तोड़ दिया गया। यह कार्रवाई जिला प्रशासन की तरफ से की गई है। अधिकारियों के मुताबिक ऑफिस बिना किसी मंजूरी बिल्डिंग प्लान के बनाया गया था।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी कार्यालय हमारे लिए मंदिर जैसा है। जमीन खरीदी गई थी और बिल्डिंग स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनाई गई थी। हमारे पास सभी दस्तावेज हैं, जिन्हें हम हाईकोर्ट में पेश करेंगे।


