बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत की जांच CBI को सौंप दी। कोर्ट ने यह फैसला दिशा के पिता की याचिका पर सुनाया। इसमें उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।
दिशा की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने से हुई थी। घटना के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह भी मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत मिले थे।
दिशा केस की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आने के बाद 2023 में इसे दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। तब से जांच जारी है।
जस्टिस एसवी कोतवाल और आरआर भोसले की बेंच ने 28 अगस्त को दिशा मामले की जांच हत्या के एंगल से कराने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हाईकोर्ट ने आज अपने फैसले में CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी को मामले की जांच की जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिर्फ FIR में नाम होने से कोई व्यक्ति आरोपी नहीं माना जाएगा। अगर जांच में कुछ नहीं मिलता है तो CBI को समरी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, पंचनामा और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट समेत जांच के कई पहलुओं पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि परिवार के संदेह जताने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। पुलिस ने पहले एक्सिडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की थी और बाद में मौत को आत्महत्या बताया। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि ADR की जांच इतनी लंबी क्यों चली।
पुलिस CrPC की धारा 174 के तहत ADR दर्ज करती है। जांच में हत्या या कोई और अपराध सामने आए तो ADR के आधार पर FIR दर्ज की जा सकती है।
ADR में पुलिस घटनास्थल का पंचनामा, शव का पोस्टमॉर्टम और गवाहों के बयान दर्ज करती है। अपराध का सबूत न मिलने पर मामला बंद किया जा सकता है। जांच पर सवाल होने पर कोर्ट के आदेश से आगे की जांच या FIR हो सकती है।
दिशा के पिता सतीश सालियान ने हाईकोर्ट में नए सिरे से जांच की मांग की थी। उनका आरोप है कि दिशा के साथ गैंगरेप और हत्या हुई और मामले को दबाने की कोशिश की गई।
उन्होंने आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR की मांग की थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिशा के पिता सतीश सालियान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा-
सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ जांच में सबूत मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ सबूत नहीं मिलता है तो उसे आरोपी नहीं बनाया जाएगा। अगर CBI की रिपोर्ट नकारात्मक आती है, तो परिवार को उस पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा।
ओझा के मुताबिक, FIR में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, परमबीर सिंह, उद्धव ठाकरे, सचिन वाजे और पिछली SIT के उन सदस्यों के नाम भी आरोपी के तौर पर दिए गए हैं, जिन पर मामले को दबाने का आरोप है।


