ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी आज सामने आई है।
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि सरकारी संस्थानों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO मजबूत संगठन बना रहना चाहिए। इसे केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) संस्था तक सीमित न कर दिया जाए।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा कि स्पेस एजेंसी के अंदर से आवाजें उठने लगी हैं। जब साराभाई और धवन की विरासत को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है तो बाकी लोगों को भी चुप नहीं रहना चाहिए।
ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसका पूरा नाम इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है। ISRO का मुख्यालय बेंगलुरु में है।
ISRO की स्थापना में डॉ. विक्रम साराभाई की सबसे अहम भूमिका थी। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। इससे पहले 1962 में INCOSPAR बनाया गया था जिसकी अगुआई भी विक्रम साराभाई ने की थी।
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) से पिछले 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों में गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं।


