हथिनी माधुरी, जिसे कोल्हापुर में महादेवी के नाम से जाना जाता है, करीब 13 महीने बाद गुजरात के वनतारा से महाराष्ट्र के कोल्हापुर लौट आई है। यहां नांदणी गांव स्थित जैन मठ पहुंचने पर शनिवार रात हजारों लोगों ने फूल बरसाकर उसका स्वागत किया।
महादेवी को जुलाई 2025 में हाई पावर कमेटी के निर्देश पर गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस फाउंडेशन के एनिमल सेंटर वनतारा भेजा गया था। कोल्हापुर में लोग इसका विरोध कर रहे थे।
मामला बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 9 सितंबर 2026 को हाई पावर कमेटी ने नांदणी की व्यवस्था का निरीक्षण करने के बाद माधुरी को वापस कोल्हापुर भेजने का आदेश दिया था।
कोल्हापुर के नांदणी में माधुरी को 1992 में लाया गया था। तब वह सिर्फ 4 साल की थी। मठ में करीब 700 साल से हाथी पालने की परंपरा रही है और माधुरी 32 साल तक यहीं रही।
महादेवी को वनतारा से गुरुवार शाम करीब 5 बजे रवाना किया गया था। करीब 1,160 किलोमीटर लंबा सफर तय करने के बाद वह शनिवार रात करीब 2 बजे नांदणी जैन मठ पहुंची। उसके पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए।
लोगों ने फूल बरसाकर उसका स्वागत किया। हालांकि, उसकी सेहत और सफर की थकान को देखते हुए स्वागत कार्यक्रम को सीमित रखा गया। महादेवी को भीड़ के बीच ज्यादा देर रखने के बजाय सीधे उसके लिए तैयार किए गए शेल्टर में पहुंचाया गया।
वनतारा के मुताबिक, उसका इलाज जारी रहने के कारण स्वास्थ्य की स्थिति स्थिर हुई है, लेकिन उसकी पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। इसलिए HPC ने माधुरी की वापसी को कुछ सख्त शर्तों के साथ मंजूरी दी है।


