रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को पाकिस्तान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के तौर पर जारी रखता है, तो भारत उससे बातचीत जारी नहीं रख सकता। देश आतंकवाद के खिलाफ हर तरह की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
सिंह ने दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी डिफेंस समिट में कहा कि भारत शांति चाहता है और किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करने की इच्छा नहीं रखता। लेकिन शांति और कायरता में फर्क है। भारत अपनी सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करेगा।
पीएम मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने की जरूरत बताई थी। उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का अधिकार है। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भावना साथ-साथ नहीं चल सकते।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर को UN में भारत को जंग की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि भारत सिंधु नदी का पानी न रोके। पानी रोकने की कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा।
शहबाज शरीफ ने UN में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया था। शहबाज ने कहा कि कश्मीर हमारे लिए गर्दन की नस है। कश्मीर का मुद्दा उठाने पर UN में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा था कि पाकिस्तान को अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की हालत देखनी चाहिए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड मेंसर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 28-29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने एलओसी पार कर पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी।


