प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सस्ती दवाओं से लेकर प्रतिभा तक, दुनिया भारत पर भरोसा करती है। भारत ने दुनिया को शून्य दिया, लेकिन कभी इसका श्रेय या रॉयल्टी नहीं मांगी।
दिल्ली में पहली बार हो रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में मोदी ने 25 मिनट स्पीच दी। कहा कि भारत की ताकत दूसरों को सक्षम बनाने में है। उन्होंने डिजिटल तकनीक, वैक्सीन सप्लाई, आर्थिक सुधारों और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका का जिक्र किया।
तीन दिन का यह कार्यक्रम 15 अक्टूबर को खत्म होगा। इस साल फोरम की थीम ‘बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोत तय करना’ है।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की शुरुआत 2018 में ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी। इसका उद्देश्य दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी चुनौतियों पर चर्चा करने और उनके समाधान तलाशने के लिए सरकारों और निजी कंपनियों के प्रमुखों को एक मंच पर लाना है।
इसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, बड़ी कंपनियों के CEO, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होते हैं। फोरम में वैश्विक व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सामान की आपूर्ति और दुनिया में बदलते शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।
मोदी ने कहा- सरकार के पास अधिकार है, लेकिन उसका उद्देश्य अपने नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाना नहीं होना चाहिए। बल्कि, उसका उद्देश्य अपने नागरिकों को सशक्त और सशक्त बनाना होना चाहिए, और भारत इसी राह पर चल रहा है।
पीएम बोले- भारत की 7.8% ग्रोथ रही है। आज हमारा फॉरेन रिजर्व 700 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। भारत का कॉन्फिडेंस ऊंचाई पर है। हमने इन्सॉल्वेंसी लॉ बनाया है। बिजनेस से जुड़ी छोटी-मोटी गलतियों को डिस्टेबिलाइज किया है। रिफॉर्म्स हमारा कन्विक्शन है।
पीएम ने कहा- इतिहास में अनेक वैश्विक संगठन बने। उनके अपने-अपने हित रहे हैं। हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, लाइफस्टाइल फॉर एन्वायर्नमेंट जैसे इनीशिएटिव लिए। भारत किन विचारों को लेकर सामने आया, ये सबके सामने है। भारत जोड़ने और जुड़ने पर बल देता है। पावर दूसरों को एम्पावर करने के लिए ही है। भारत रिलायबिलिटी और स्टेबिलिटी की बात करता है।


