जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 25 विधायकों की ज्यादातर मांगें मानने से इनकार कर दिया है। शुक्रवार को श्रीनगर में पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के घर हुई बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे।
विधायकों ने डिप्टी CM सुरिंदर चौधरी को पद से हटाने या उनसे सड़क एवं भवन निर्माण विभाग वापस लेने की मांग की थी। सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी CM से R&B विभाग वापस लिए जाने की संभावना है। हालांकि, उन्हें पद से हटाने पर सहमति नहीं बनी है।
पार्टी नेतृत्व ने कैबिनेट में फेरबदल और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर सोगमी को हटाने की मांग भी खारिज कर दी है। बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस कभी नहीं टूटेगी।
फारूक ने विधायकों के साथ बैठक के बाद कहा- मैंने विधायकों की शिकायतें सुनी हैं, हम उन पर काम करेंगे। कुछ का समाधान तुरंत होगा, तो कुछ का धीरे-धीरे होगा।
वहीं नाराज विधायकों के नेता नजीर गुरेजी ने कहा- हमने पार्टी लीडरशिप के सामने अपनी शिकायतें रखी हैं, उन पर जल्द ध्यान दिया जाएगा।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व से मुलाकात के बाद भी विधायकों की नाराजगी खत्म नहीं हुई। उन्होंने विधायक नजीर गुरेजी के घर बंद कमरे में एक और बैठक की।
27 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार हुआ था। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायक अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू मंत्री बनाए गए। वहीं, निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया।
इस विस्तार में कई वरिष्ठ विधायकों को मंत्री पद नहीं मिला। इनमें नजीर अहमद गुरेजी और मुबारक गुल भी शामिल थे। बाद में फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को अली मोहम्मद सागर की जगह पार्टी का महासचिव नियुक्त किया।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 95 सीटें हैं। इनमें 90 निर्वाचित और 5 मनोनीत सीटें हैं। फिलहाल सभी मनोनीत सीटें खाली हैं। इसलिए सदन में बहुमत के लिए 46 सीटें चाहिए।
अभी NC गठबंधन के पास 53 सीटें हैं। अगर 25 विधायक इस्तीफा देते हैं, तो गठबंधन की सीटें घटकर 28 रह जाएंगी। इसके बाद सदन में प्रभावी विधायकों की कुल संख्या 65 रह जाएगी और बहुमत का नया आंकड़ा 33 हो जाएगा। ऐसी स्थिति में 28 सीटों के साथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी।


