फरीदाबाद। गांव सिवाह की बेटी और वर्तमान में फरीदाबाद के सरकारी प्राथमिक विद्यालय, मुजेसर में तैनात जेबीटी अध्यापिका रेखा कादियान को शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय नवाचार और समर्पण के लिए नेशनल अवार्ड 2025 से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें 5 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर में राह ग्रुप फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया जाएगा।
राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन नरेश सेलपाड़ के अनुसार, इस वर्ष अवार्ड के लिए देशभर से 2516 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से केवल 51 श्रेष्ठ विभूतियों का चयन किया गया है। चयनित प्रतिभाओं को समारोह के बाद डल झील, गुलमर्ग, शालीमार बाग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा।
शिक्षा को बनाया सहज और रचनात्मक
रेखा कादियान ने अपने करियर की शुरुआत गुरुग्राम के चौमा स्कूल से की थी और आज वे बच्चों को कविताओं, कहानियों और बाल गीतों के माध्यम से खेल-खेल में शिक्षा देने के लिए जानी जाती हैं। वे सक्षम हरियाणा और निपुण भारत मिशन के तहत सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उनकी नवाचारी शिक्षण शैली की सराहना स्वयं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर भी कर चुके हैं।
डिजिटल शिक्षा और साहित्य में योगदान
रेखा ने दीक्षा पोर्टल एससीईआरटी और निपुण पत्रिका में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने बच्चों के लिए कहानियों की एक पुस्तक भी लिखी है, जो भाषा कौशल को निखारने में सहायक है। लॉकडाउन के दौरान वे लगातार ऑनलाइन कंटेंट निर्माण कर शिक्षा से जुड़े रहीं। रेखा जरूरतमंद बच्चों के लिए शिक्षण सामग्री जुटाने, ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने और घर-घर जाकर सर्वे करने जैसे कामों में भी अग्रणी रही हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय पति संदीप कादियान को देती हैं, जिनका सहयोग उन्हें हर कदम पर मिला।
राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान
रेखा को अब तक 15 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें सक्षम बेस्ट ब्लॉक टीचर, एफएलएन योद्धा अवार्ड, एससीईआरटी अवार्ड, शिक्षा मंत्री से स्टार टीचर सम्मान आदि प्रमुख हैं। उनके शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। इससे पहले यह अवार्ड कार्यक्रम विदेशों में आयोजित होता था, लेकिन अब देश का पैसा देश में नीति के तहत इसे भारत में आयोजित किया जा रहा है। इससे देश के पर्यटन, रोजगार और सांस्कृतिक जुड़ाव को बल मिलेगा। रेखा कादियान का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की जीत है, बल्कि यह प्रेरणा है उन सभी शिक्षकों के लिए, जो शिक्षा को सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम मानते हैं।


