फरीदाबाद। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन एवं न्यायमूर्ति पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट चंडीगढ़, हरसिमरन सिंह सेठी के दिशा निर्देशानुसार हरियाणा प्रांत में प्रत्येक जिले के अंदर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया! इसी क्रम में जिला फरीदाबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं चेयरमैन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुधीर जीवन की अध्यक्षता एवं निर्देशानुसार तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव जितेंद्र सिंह की देखरेख में आज जिला अदालत सेक्टर 12, फरीदाबाद में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।
इस लोक अदालत में 19बेंच लगाए गए जिनमें सुधीर जीवन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, कंवरपाल सिंह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अजय शर्मा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, विनीत सपरा अतिरिक्त प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट, रितु यादव अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, सौरभ शर्मा जुडिशल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमितेंद्र सिंह जुडिशल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, हिमानी जुडिशल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिज्ञासा शर्मा जुडिशल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोमल दहिया जुडिशल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, उपासना दहिया जुडिशल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जयोत्सना रावत न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, रजत कुमार कनौजिया न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी,
वर्तिका मिश्रा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, आनिया खिजरा अशरफ न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, पंखुरी शुक्ला न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, सारिका न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम ,पारस चौधरी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, सरिता सोलंकी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की बेंच बनाई गई जिनमें 131940 केस रखे गए जिनमे 125165 केसों का निपटारा/ आपसी सहमति से लोक अदालत द्वारा किया गया जिनमें मोटर वाइकल दुर्घटना 52, छोटे-मोटे अपराधिक मामले 2564, चेक बाउंस 408, बिजली से संबंधित 872, समरी चालान 112850, वैवाहिक संबंधित 199, दीवानी 562, बैंक रिकवरी 3608, रेवेन्यू 4030,एग्जीक्यूशन 20 का निपटारा आपसी सहमति से किया गया।
सीजेएम जितेंद्र सिंह ने बताया कि आज की लोक अदालत में लोगों का ट्रैफिक केसों को लेकर लोगों का रुझान रहा यानी की इस लोक अदालत में अधिक से अधिक ट्रैफिक चालान से संबंधित केसों का निपटारा किया गया इस अवसर पर न्यायिक दंडाधिकारी ने कहा कि लोक अदालत में फैसला होने पर जिसकी सुप्रीम कोर्ट तक कोई अपील नहीं होती कोर्ट फीस वापस हो जाती है तथा केस का फैसला हमेशा हमेशा के लिए हो जाता है जिससे पैसे व समय की बचत होती है।


