दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में 6 साल बाद फैसला कर दिया है। कोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है।
एडीशनल सेशन जज प्रवीण सिंह की अदालत ने 11 आरोपियों के खिलाफ चल रहे मामले में सोमवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने नाज़िम, काशिम, अनस, जावेद और ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण, दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगा करने का दोषी ठहराया। बाकी 6 आरोपी बरी कर दिए।
यह मामला दयालपुर थाने में अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया था। 25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा ऑफिस से घर लौटने के बाद दोबारा बाहर निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं आए। परिवार उनकी तलाश कर रहा था, तभी लोगों ने बताया कि उनकी हत्या कर शव को चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है। अगले दिन सुबह पुलिस ने नाले से उनका शव बरामद किया था।
रविंदर कुमार का आरोप था कि उनके बेटे की हत्या तत्कालीन AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने की। शिकायत के अनुसार, आरोपी ताहिर हुसैन के ऑफिस में इकट्ठा हुए थे और हत्या के बाद अंकित के शव को नाले में फेंक दिया गया।
23 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी और समर्थक आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से पथराव होने लगे थे। 26 फरवरी तक चले दंगों में 53 लोगों की जान गई और 250 से ज्यादा जख्मी हो गए थे। मरने वालों में 38 मुसलमान और 15 हिंदू थे। करीब 800 दुकानें जला दी गईं। 500 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया गया था।


