केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ‘जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंपने’ वाले बयान पर मंगलवार को सफाई आई। गडकरी के ऑफिस ने कहा, ‘उन्होंने अपने ट्रस्ट से जुड़े सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपने की बात कही थी।’
ऑफिस ने कहा कि उनके बयान का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। दरअसल, कई मीडिया रिपोर्ट्स में गडकरी के इस बयान को उनके राजनीति से रिटायरमेंट लेने से जोड़ दिया गया था।
गडकरी का यह बयान 23 अगस्त का है। उन्होंने पुणे में कहा था, ‘अब ज्यादा काम नहीं कर सकता। जब कर सकता था, तब किया। नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।’
नितिन 37 साल से ज्यादा राजनीति में हैं। पिछले 12 साल से मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। इनके पास सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय है।
महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रगान के दौरान गडकरी अचानक लड़खड़ाकर बेहोश हो गए। महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने उन्हें संभाला। डॉक्टरों ने जांच की और कुछ देर बाद वे सामान्य हो गए। शुरुआत में गडकरी ने खुद ट्वीट किया कि उन्हें लो ब्लड शुगर की वजह से हल्की परेशानी हुई थी। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में भाषण देते हुए गडकरी अचानक बेहोश होकर मंच पर गिर पड़े। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला। कुछ देर बाद वे ठीक हुए और अपना भाषण पूरा भी किया। इस बार गडकरी ने खुद बताया कि उन्हें तेज गर्मी के कारण असहज महसूस हुआ था और बाद में वे अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।
मेडिकल रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि उन्हें टाइप-2 डायबिटीज थी और 2011 में इसके इलाज के लिए उन्होंने गैस्ट्रिक/बेरियाट्रिक सर्जरी कराई थी। उस समय BJP के बयान के अनुसार उनका शुगर नियंत्रण मुश्किल था और शुरुआती डाइबिटिक नेफ्रोपैथी भी बताई गई थी।नितिन गडकरी का राजनीतिक सफर करीब पांच दशक लंबा है। उन्होंने 1970 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत की और 1989 में पहली बार महाराष्ट्र विधान परिषद पहुंचे। वे महाराष्ट्र में PWD मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
2009 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। 2014 में नागपुर से लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद मोदी सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बने और तब से इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।


