सुप्रीम कोर्ट बोला-चुनाव आयोग 4 महीने में TMC विवाद सुलझाए:पार्टी का नाम-सिंबल फ्रीजसुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और ‘फूल-पत्ती’ चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर फैसला देने की समय-सीमा तय की। कोर्ट ने दोनों गुटों को एक महीने में अपनी दलीलें पूरी करने और इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने में फैसला देने का निर्देश दिया।
यानी पूरी प्रक्रिया 4 महीने में पूरी करनी होगी। चुनाव आयोग ने विवाद को सुलझाने के लिए 6 महीने का समय देने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
यह आदेश ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। उन्होंने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें TMC के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल रोक दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया है कि वे TMC विवाद को जल्दी सुलझाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करें।
कोर्ट ने कहा कि इन आधुनिक तकनीकों की मदद से जटिल कानूनी दस्तावेजों को पढ़ने और समझने का काम बहुत तेजी से हो सकता है, जिससे यह पूरा मामला 6 महीने की बजाय सिर्फ 3 महीने में ही निपटाया जा सकेगा।
बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव हैं। टीएमसी के दोनों गुटों ने असली नाम और सिंबल पर चुनाव लड़ने की मांग की थी। EC ने 17 सितंबर को ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं की सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया।
आयोग ने 18 सितंबर को ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न दिया, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होंगे। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। दोनों गुटों ने एक ही चिह्न पर उम्मीदवार उतारे थे। कोर्ट के नाम-सिंबल फ्रीज करने के बाद अब उम्मीदवार नए चिह्नों पर चुनाव लड़ेंगे।


