सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा। कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी रिकॉर्ड में गड़बड़ी के तहत मतदाताओं को नोटिस देने का आधार पूछा।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 47 लाख नाम हटाए गए हैं। जबकि करीब 33 लाख ऐसे मतदाताओं को नोटिस दिए गए हैं, जिनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में बने हुए हैं।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने आयोग से यह जांचने को कहा कि कहीं बिना पर्याप्त जांच के तो नोटिस नहीं भेजे जा रहे। नोटिस में वोटर्स को आपत्ति की सही वजह बताई जा रही है या नहीं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मतदाता को नोटिस में साफ बताया जाना चाहिए कि किस जानकारी या रिकॉर्ड में अंतर मिला है और उसे क्या स्पष्ट करना है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को अब तक उठाए गए कदमों की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, बिहार और पश्चिम बंगाल SIR मामलों में दिए अंतरिम निर्देशों का पालन करने को कहा।
चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है।
पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।
चुनाव आयोग ने SIR के तहत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं नोटिस भेजा। पुरानी वोटर लिस्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक सीएम रेखा और उनके पेरेंट्स की उम्र के बीच फर्क 15 साल से कम था। लेकिन बाद में उन्होंने सही डॉक्यूमेंट्स जमा कर दिए।


