राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के बालाघाट में बिरसा ब्लॉक के जगला गांव में बैगा आदिवासियों से मुलाकात की। यहां वे करीब एक घंटे रुके और बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों से भी मिले। राहुल से मिलने आसपास के गांवों से करीब डेढ़ हजार लोग पहुंचे। इससे पहले उन्होंने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल में बच्चों से मिड डे मील के बारे में जाना।
बालाघाट में पिछले 3 महीनों में कुपोषण और मलेरिया से 32 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। राहुल ने कहा कि बीमारी से निपटने में राज्य सरकार पूरी तरह फेल रही। वे यह मुद्दा लोकसभा में उठाएंगे। कांग्रेस का दावा है कि मौतों की संख्या ज्यादा है।
उन्होंने आदिवासी महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। भाजपा ने राहुल के दौरे को राजनीतिक माइलेज लेने की कवायद बताया है।
हिरोंदी धुर्वे ने बताया कि उनके तीन बेटे थे, जिनमें सबसे छोटे की 23 मई को मौत हो गई। उन्होंने कहा कि बच्चा एक महीने से भी कम उम्र का था। उसे पीलिया, बुखार और शरीर पर दाने हुए थे। बीमारी के दौरान कोई सरकारी डॉक्टर घर देखने नहीं आया। प्राइवेट डॉक्टर से दवा और सिरप लिया था।
हिरोंदी ने बताया कि राहुल गांधी से मुलाकात में उन्होंने बच्चे की मौत की बात कही, तो मुआवजा दिलाने का आश्वासन मिला। उन्होंने गांव में अस्पताल और खराब सड़क की समस्या भी बताई। कहा कि उन्हें लाड़ली बहना योजना का लाभ भी नहीं मिलता।
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासियों की जमीन, मनरेगा, वन अधिकार कानून और जमीन के अधिकारों से जुड़े मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। उन्होंने सरकार से अपनी जिम्मेदारी निभाने और आदिवासियों को उनका हक दिलाने की अपील की। राहुल ने कहा कि उन्हें अस्पताल और स्कूल जैसी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।


