57 दिन की अमरनाथ यात्रा शुक्रवार से शुरू हो गई। यात्रा का पहला जत्था गांदरबल जिले के बालटाल और अनंतनाग जिले के पहलगाम (नुनवान) बेस कैंप से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे में 4,822 श्रद्धालु शामिल हैं।
ये सभी श्रद्धालु गुरुवार को बेस कैंप में पहुंचे थे। जम्मू-कश्मीर प्रशासन के मुताबिक, पहले जत्थे के श्रद्धालुओं के साथ जवान और अन्य व्यवस्थाओं में लगे लोग मिलाकर कुल 9 हजार लोग आज शाम तक दर्शन करेंगे।
यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं। दोमेल रूट पर चार जगह बड़ी स्क्रीन के जरिए मौसम की जानकारी दी जा रही है। बालटाल रूट पर 12 जगह वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं।
अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल से है। यात्रा 28 अगस्त को खत्म होगी।
यात्रा के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट, 4 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड, ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म अपने साथ रखें। फिजिकल फिटनेस के लिहाज से हर रोज 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलने की प्रैक्टिस करें। सांस वाला योग जैसे प्राणायाम और एक्सरसाइज करें। यात्रा में ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पानी बॉटल और जरूरी दवाओं का बैग अपने साथ रखें।
19वीं शताब्दी के अंत में यात्रा के रास्ते और सुविधाएं विकसित की गईं। 2000 में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) बनने के बाद यात्रा का पंजीकरण, सुरक्षा और प्रबंधन अधिक व्यवस्थित हुआ।
अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु 2029 से बालटाल रूट पर केबल कार से सफर कर सकेंगे। केंद्र सरकार अगले साल अप्रैल से 11.6 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू करने की तैयारी में है। परियोजना पूरी होने के बाद बालटाल से संगम टॉप तक पहुंचने में 5 से 8 घंटे की जगह 25 से 30 मिनट लगेंगे।


