आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को दिल्ली में कहा, ‘आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है। हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्र जंतर-मंतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों को शरणार्थी कहना सही नहीं है। वे ‘संघर्ष के योद्धा’ थे, जिन्होंने कई पीढ़ियों की बनाई जमीन, कारोबार और संपत्ति छोड़कर भारत को चुना।
उन्होंने कहा कि ये लोग इसलिए भारत आए, क्योंकि यहां बिना डर अपने धर्म का पालन कर सकते थे। भारत को एक रखने की लड़ाई हम सब हार गए थे, लेकिन उन्होंने अपना विश्वास नहीं छोड़ा। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने केरल के त्रिशूर में संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान रजिस्ट्रेशन के सवाल पर कहा- देश में कई ऐसी संस्थाएं हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। संघ के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
दरअसल, भागवत से पूछा गया था कि कर्नाटक सरकार ने RSS की गतिविधियों को गुप्त बताते हुए कहा है कि संगठन को रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। इसके जवाब में उन्होंने कहा- संघ को किसी को जवाब देने की जरूरत नहीं है। यह कोई गुप्त संगठन नहीं है, बल्कि खुलकर काम करता है। सरकार जानती है कि संघ का अस्तित्व है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा की बात कही जाती है।
RSS प्रमुख ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो हिंदू संगठन के लिए काम करता है। वही सरसंघचालक (RSS प्रमुख) बनता है।जेन-जी यानी 1997-2012 के बीच जन्मी पीढ़ी डिजिटल युग में बड़ी हुई है। यह सोशल मीडिया, तेज सूचना और नेटवर्किंग का इस्तेमाल बेहतर करती है। यह पीढ़ी पारंपरिक तरीकों के बजाय क्रिएटिव और विजुअल तरीकों से अपनी बात रखने के लिए जानी जाती है।
पीढ़ियों को नाम देने का चलन 20वीं सदी में अमेरिका में लोकप्रिय हुआ। एक्सपर्ट्स ने अलग-अलग दौर में जन्मी आबादी के व्यवहार, सामाजिक घटनाओं और तकनीकी बदलावों को समझने के लिए इन्हें नाम देना शुरू किया।


