पूर्व आर्मी चीफ चीफ जनरल एमएम नरवणे ने गुरुवार को कहा कि 2020 में चीन के साथ गतिरोध में सरकार ने सेना को अकेला नहीं छोड़ा था। सरकार पूरी तरह से सपोर्ट में थी और पूरा अधिकार दिया था कि हालात बिगड़ने पर चीनी सैनिकों पर गोलियां चला सकें।
जनरल नरवणे ने गुरुवार को कुछ चैनल्स को दिए इंटरव्यू में अपनी किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ से जुड़े विवादों पर बात की।
इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, ‘जो उचित समझो वह करो’ टिप्पणी सशस्त्र बलों पर सरकार के पूरे भरोसे को दर्शाती है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जमीनी स्थिति का जवाब देने के लिए सशस्त्र बलों को फ्री हैंड दिया गया था।
दरअसल, राहुल गांधी ने 2 और 3 फरवरी को संसद में नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का हवाला देकर चीन घुसपैठ और अग्निवीर योजना के रीव्यू का मुद्दा उठाया था। इसके बाद उन्होंने दावा किया था कि सरकार ने सेना को अकेला छोड़ दिया था। इसके बाद वे किताब लेकर भी संसद पहुंचे थे।
जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि उनकी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में उनके सैन्य करियर के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद, अग्निपथ योजना का जिक्र था। इसक साथ की उन्होंने सेना प्रमुख रहते हुए उनके रणनीतिक निर्णयों के बारे में भी गया है।
31 अगस्त 2020 को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर कैलाश रेंज में हुए भारतीय सेना को चीनी उकसावे का जवाब कैसे देना चाहिए, सरकार ने इस पर तुरंत कोई पॉलिटिकल निर्देश नहीं दिया था। यही विवाद की वजह है।
कांग्रेस ने एक मैगजीन में पब्लिश आर्टिकल के पेज सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किए। इसमें पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश बुक Four Stars of Destiny के अंश हैं। इसमें 31 अगस्त 2020 को लद्दाख सीमा पर भारत-चीन के बीच बने हालात का जिक्र है। बताया जब चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में बढ़ रहे थे तब क्या हुआ?


