भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को लॉ स्टूडेंट से कहा कि आप किसी के साथ असहमत हो सकते हैं लेकिन उसकी गरिमा बनाए रखें। कोई भी फैसला देने से पहले सामने वाले को भी सुनें।
CJI नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) बेंगलुरु के 34वें एनुअल दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। CJI ने कहा कि कानूनी शिक्षा सिर्फ एकेडमिक नॉलेज तक सीमित नहीं होनी चाहिए। छात्रों को अलग-अलग विचारों को समझना जरूरी है।
इससे पहले यूनिवर्सिटी के 700 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व छात्रों ने CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई थी।
इसके चलते 27 अगस्त को यूनिवर्सिटी ने 12 सितंबर को होना वाला दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया था। हालांकि, पिछले महीने यूनिवर्सिटी ने दीक्षांत समारोह रद्द करने का अपना फैसला वापस ले लिया।
न्याय के लिए खड़े होने का साहस जरूरी: कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल आपराधिक या संवैधानिक कानून के सिद्धांतों को सीखना नहीं है। इसका मकसद ऐसे लोगों से संवाद करने का अनुभव हासिल करना भी है, जो दुनिया को हमसे अलग नजरिए से देखते हैं। कानून और न्यायिक फैसलों का ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। न्याय के लिए खड़े होने का साहस और अनसुनी आवाजों की चिंताओं को सुनने की विनम्रता भी जरूरी है। समाज में योगदान देने की भी जरूरत है: छात्रों को अपने सिद्धांतों से समझौता करने और प्रोफेशनल लाइफ में शॉर्टकट से बचना चाहिए। कानूनी पेशे के जरिए अन्याय को दूर करने, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान को बनाए रखने से वकीलों को संतुष्टि मिल सकती है। राष्ट्र हमसे सिर्फ कानून के पेशेवर के तौर पर नहीं, बल्कि समाज में योगदान देने की भी उम्मीद करता है।कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत का विरोध लॉ यूनिवर्सिटीज में शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत NALSAR हैदराबाद से हुई थी। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं।
करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख तय नहीं हुई थी।
NALSAR, हैदराबाद के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया। छात्रों ने CJI की कथित टिप्पणियों और दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कार्यवाही पर सवाल उठाए।
विवाद बढ़कर BCI तक पहुंचा। BCI ने कुछ समय के लिए 2026 के NALSAR ग्रेजुएट्स के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया। हालांकि इसे वापस ले लिया गया। CJI सूर्यकांत ने बाद में कहा कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था।


