सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी नहीं है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि यह मान लेना गलत है कि किसी व्यक्ति ने चालान भरने से बचने के लिए नंबर प्लेट छिपाई है। यह केवल पुलिस का अनुमान है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल एक्ट (MV Act) के तहत यह जुर्माना लगाने का आधार हो सकता है, लेकिन इसे आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। धोखाधड़ी साबित करने के लिए बेईमानी की नीयत, किसी को प्रेरित करना और संपत्ति का नुकसान होना जरूरी है।
याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल अहद शाकेर 5 जून 2020 को अपनी होंडा एक्टिवा चला रहे थे, जिसकी पिछली नंबर प्लेट पर काला मास्क लगा था। गश्त पर तैनात पुलिसकर्मी ने उन्हें रोका और चालान से बचने के लिए पुलिस को धोखा देने का आरोप लगाते हुए आईपीसी की धारा 420 और एमवी एक्ट की धारा 80(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद चार्जशीट दाखिल हुई और मजिस्ट्रेट ने इस पर संज्ञान लिया।
याचिकाकर्ता ने एफआईआर रद्द करने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि केवल पिछली नंबर प्लेट ढकी हुई थी, जबकि सामने की प्लेट साफ दिख रही थी। कोर्ट ने कहा कि यह किसी सोची-समझी योजना के तहत पहचान छिपाने जैसा नहीं लगता। अदालत ने माना कि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। यही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश भी जारी किए।
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं।


