दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा- स्वास्थ्य बिगड़ने और डिवीजन बेंच के आदेश के कारण उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
सरकार की इस कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता। वांगचुक को वहीं दवाएं दी जा रहीं, जिसमें उनकी रजामंदी है। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ पुलिस को 3 दिन में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
दरअसल सोनम की पत्नी गीतांजलि ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट हॉस्पिटल शिफ्ट करने की मांग की थी। मामले में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
दिल्ली पुलिस शनिवार सुबह वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। अस्पताल में भी वांगचुक की भूख हड़ताल जारी है।
vदिल्ली पुलिस के आयुक्त अनुराग कुमार के पद संभालने के 24 घंटे में वांगचुक को धरना स्थल से उठवाकर अस्पताल पहुंचा दिया गया। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात 1:30 बजे इसके निर्देश मिले। फिर नई दिल्ली जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंदिर मार्ग थाने में रणनीति बनाई।
एक मिनट में बिना टकराव के वांगचुक को कैसे एम्बुलेंस तक ले जाएं, इसकी रिहर्सल की। जैमर लगाने पर भी चर्चा हुई, ताकि कार्रवाई के वीडियो न फैलें। सुबह 5 बजे अधिकारी जंतर-मंतर पहुंचें। वहां अंतिम ब्रीफिंग दी। फिर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी सफेद चादरें लेकर मंच पर चढ़ गए। कार्रवाई की वीडियोग्राफी से बचने के लिए चादरों का इस्तेमाल किया गया।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा, सरकार ने कहा कि उनकी तबीयत बिगड़ रही थी इसलिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन यह दावा सही नहीं है। सबसे पहले, उनकी तबीयत बिल्कुल नहीं बिगड़ रही थी। एक शाम पहले की मेडिकल रिपोर्ट देखें तो सब कुछ सामान्य था। उनका पोटैशियम स्तर 4.3 था और बाकी सभी पैरामीटर भी सामान्य थे।”
अगर सरकार वास्तव में उनकी सेहत को लेकर चिंतित थी, तो सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को क्यों भेजा गया? उन्हें इतनी सख्ती से स्ट्रेचर पर डालकर क्यों ले जाया गया? लोकतंत्र में सही तरीका यह होता कि डॉक्टर जांच करते, परिवार को बताते कि कौन-सा पैरामीटर कम है और फिर अस्पताल ले जाने की जरूरत समझाते।


