केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि पिछले साल हुए एयर इंडिया AI-171 विमान हादसे की जांच में फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉकिंग मैकेनिज्म में कोई खराबी नहीं मिली है। विमान बनाने वाली कंपनी द्वारा किए गए एडवांस टेस्ट के बाद यह जानकारी सामने आई है।
हालांकि, पिछले साल जारी AAIB की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे। इससे दोनों इंजन बंद हो गए थे।
12 जून 2025 को लंदन जाने वाली AI-171 फ्लाइट मेघानीनगर में BJ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर क्रैश हो गई, जिसमें विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई। सिर्फ एक यात्री जिंदा बचा था। उन्होंने साफ किया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉकिंग मैकेनिज्म की जांच में कोई भी कमी नहीं पाई गई है।
सरकार ने यह भी साफ किया कि विमान हादसे की जांच रिपोर्ट जारी होने में किसी तरह की देरी नहीं हुई है। जेबी मेथर हिशाम ने पूछा था कि हादसे के एक साल से अधिक समय बाद भी अंतिम रिपोर्ट क्यों जारी नहीं हुई, क्या जांच में पायलटों की भूमिका भी देखी जा रही है और रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी।
इस पर मोहोल ने कहा कि इतने बड़े विमान हादसों की जांच किसी तय समय सीमा में पूरी नहीं की जा सकती। जांच कई तकनीकी पहलुओं और लगातार बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए इसकी समयसीमा पहले से तय नहीं होती।
मंत्री ने कहा कि दुर्घटना के सभी संभावित कारणों और उससे जुड़े हर योगदान देने वाले कारकों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होगी।
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI 171 टेकऑफ के कुछ ही देर बाद एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गई थी। इसमें 270 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 241 यात्री और क्रू मेंबर शामिल थे। सिर्फ एक यात्री इस हादसे में जिंदा बचा था।
फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, विमान का आखिरी सिग्नल 190 मीटर (625 फीट) की ऊंचाई पर मिला, जो उड़ान भरने के तुरंत बाद आया था।
भारत के सिविल एविएशन रेगुलेटर DGCA ने बताया कि विमान ने 12 जून की दोपहर 1:39 बजे रनवे 23 से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के बाद विमान के पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को मेडे कॉल (इमरजेंसी मैसेज) भेजा, लेकिन इसके बाद कोई जवाब नहीं मिला।


