सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि NEET परीक्षा सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है। इसमें सेंध लगाना मुश्किल है। पेपर तैयार करने से लेकर एग्जाम सेंटर में पहुंचाने तक पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा जाता है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से UPSC जैसा मजबूत परीक्षा सिस्टम बनाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी समझने वाले अधिकारियों को शामिल करना चाहिए। साथ ही अनुभवी अधिकारियों के बार-बार ट्रांसफर से बचने की सलाह दी।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, FAIMA और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें NTA को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने बाद दोबारा कहा कि NTA को UPSC की तरह ऐसा मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद भी संस्था के पास बना रहे।
कोर्ट ने कहा कि कागज पर प्रक्रिया बेहतर दिख सकती है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि एक परीक्षा के बाद अगली परीक्षा तक व्यवस्था में वही कमजोरियां दोबारा न लौटें।
केंद्र सरकार ने 22 जून 2024 को पूर्व इसरो चीफ के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। कमेटी ने NTA के एग्जाम में जरूरी सुधार, पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों पर 101 सिफारिशें की थीं।
NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 सेंटर्स में हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।
12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 21 जून को नीट की परीक्षा दोबारा हुई थी। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।


