तृणमूल कांग्रेस (TMC) में टूट से संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा में NDA को फायदा हो सकता है। राज्यसभा में अभी एनडीए के पास 148 सांसद हैं। राज्यसभा चुनाव और टीएमसी सांसदों के इस्तीफे के बाद संख्या 154 तक पहुंच सकती है।
लोकसभा में NDA के पास फिलहाल 294 सांसद हैं। TMC के 20 बागी सांसदों के समर्थन के बाद यह संख्या 314 तक पहुंच जाएगी। अभी NDA लोकसभा में दो-तिहाई से 66 सीट और राज्यसभा में 15 सीट दूर है।
राज्यसभा में INDIA ब्लॉक के पास फिलहाल 64 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के TVK को समर्थन देने से DMK नाराज है और उसने गठबंधन से दूरी बना ली है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) भी INDIA ब्लॉक से अलग हो चुकी है।
वहीं, YSRCP, BJD और MDMK जैसे क्षेत्रीय दलों के पास भी पर्याप्त संख्या में सांसद हैं। किसी करीबी मतदान की स्थिति में इन दलों की भूमिका अहम हो सकती है।
लोकसभा में 16 अप्रैल 2026 को सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल लोकसभा में गिर गया था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई थी। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े।
बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। 12 साल के शासन में यह पहला मौका था, जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई थी।
12 राज्य की 26 राज्यसभा सीटों पर 23 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इनमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु की 1-1 सीट पर उपचुनाव थे। जीतने वालों में 12 भाजपा, 5 कांग्रेस, 3 TDP, 1 NCP, 1NPP और 1 जनसेना से है। चुनाव जीतने वालों में कर्नाटक से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मीडिया व प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा का नाम शामिल है।


