उल्लेखनीय है कि फरीदाबाद के सूरजकुंड में लोकल फॉर ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम के साथ 39वां मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है और यहां देश-विदेश की कला, संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। ऐसे माहौल में बहरूपियों की मौजूदगी मेले को और जीवंत बना रही है। कोई बंदर-लंगूर, जिन, चार्ली चेंपिन के रूप में नजर आ रहा है तो कोई गब्बर, रावण, पीके, जीनी व अन्य पात्र बनकर लोगों का मनोरंजन कर रहा है। छोटे बच्चे इन कलाकारों को देखकर उत्साहित हो उठते हैं, वहीं युवा उनके साथ अलग-अलग अंदाज में तस्वीरें लेना नहीं भूलते। बहरूपिए इस सांस्कृतिक उत्सव में पारंपरिक लोक मनोरंजन की याद दिलाते हुए आधुनिक दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं।
मेले में घूमने आए कई पर्यटकों का कहना है कि बहरूपिए भारतीय लोक परंपरा का अहम हिस्सा रहे हैं और इन्हें करीब से देखना एक अलग अनुभव देता है। सोशल मीडिया के दौर में इन कलाकारों के साथ ली गई तस्वीरें तुरंत इंटरनेट पर साझा की जा रही हैं, जिससे मेले की लोकप्रियता और बढ़ रही है। सूरजकुंड मेला अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, जहां देश-विदेश के शिल्पकारों की भागीदारी इसे वैश्विक पहचान देती है। यही कारण है कि यहां हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास देखने को मिल जाता है।


