सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में फर्स्ट ईयर के रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या ने रैगिंग से परेशान होकर सुसाइड कर लिया था। रैगिंग का आरोप सेकंड ईयर के चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर लगा है। फिलहाल इन्हें छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही उन्हें हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सोमवार को चारों के खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई होगी। साथ ही एचओडी और तीन फैकल्टी सदस्यों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी, एंटी रैगिंग स्क्वाड और कॉलेज काउंसिल की जांच में पता चला है कि आरोपी डॉक्टर कुछ जूनियर डॉक्टर्स को परेशान कर रहे थे। इसी से तंग आकर माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के हर्ष पंड्या ने रविवार रात को अपने कमरे में फांसी लगा ली थी।
रविवार सुबह हॉस्टल के रूम नंबर 1004 का दरवाजा अंदर से बंद था। हर्ष पंड्या से संपर्क नहीं हो पाने पर उनके साथी डॉक्टर कमरे के बाहर पहुंचे। काफी देर तक दरवाजा न खुलने पर सिक्योरिटी स्टाफ को बुलाया गया। स्टाफ ने दरवाजा तोड़ा और हर्ष पंड्या को पंखे से लटके देखा। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टर हर्ष पंड्या की मौत की खबर मिलते ही उनके पिता, चचेरे भाई और कई रिलेटिव सूरत सिविल अस्पताल पहुंचे। इस घटना में रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच रैगिंग का मुद्दा उठा और परिवार ने आरोप लगाया कि हर्ष ने रैगिंग के चलते आत्महत्या की है।
परिवार के आरोपों के बाद मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी, एंटी रैगिंग स्क्वाड और कॉलेज काउंसिल ने जांच की। तीनों टीमों ने करीब 8 घंटे तक टीचर्स से लेकर स्टाफ तक से बारी-बारी से पूछतात की। जांच में रैगिंग के आरोप सही पाए।
कुछ पीड़ितों ने बताया कि चोरों आरोपी सीनियर्स उन्हें कमरों में बंद कर कई-कई घंटों तक टॉर्चर करते थे। गालियां देते थे और मारपीट करते थे।
जांच में यह भी पता चला है कि इस घटना से पहले शिक्षकों से रैगिंग को लेकर शिकायत भी की गई थी। अब इसकी भी जांच की जा रही है कि आखिर पहले ही आरोपियों के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया गया।


