यूपी के तीन मंदिर-मस्जिद विवादों को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ये विवाद वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े हैं।
बार एंड बेंच के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए ‘समाधान समारोह 2026’ पहल के तहत लेटर भेजकर मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था और दोनों पक्षों से सहमति मांगी थी। किसी भी पक्ष ने इसके लिए सहमति नहीं दी। कोर्ट ने यह लेटर कब भेजा था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
दोनों पक्षों ने कहा है कि वे अदालत में ही केस लड़कर फैसला चाहते हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट परिसर में 21 से 23 अगस्त तक ‘समाधान समारोह’ के तहत विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत के जरिए हल निकालना है।
यूपी के तीन मंदिर-मस्जिद विवादों को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ये विवाद वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े हैं।
बार एंड बेंच के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए ‘समाधान समारोह 2026’ पहल के तहत लेटर भेजकर मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था और दोनों पक्षों से सहमति मांगी थी। किसी भी पक्ष ने इसके लिए सहमति नहीं दी। कोर्ट ने यह लेटर कब भेजा था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
दोनों पक्षों ने कहा है कि वे अदालत में ही केस लड़कर फैसला चाहते हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट परिसर में 21 से 23 अगस्त तक ‘समाधान समारोह’ के तहत विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत के जरिए हल निकालना है।
अब सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई होगी और दोनों पक्ष अपने-अपने सबूत व दलीलें पेश करेंगे। फिलहाल दोनों पक्षों ने इनकार किया है। यदि भविष्य में दोनों पक्ष सहमत हों, तो अदालत फिर मध्यस्थता पर विचार कर सकती है।
अब मामले का फैसला पूरी न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा, इसलिए समय लग सकता है। अब अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और फैसले से ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने से जुड़े मामलों में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने का फैसला निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। अब इन सभी मामलों की दोबारा सुनवाई संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल करेगा।


