महाराष्ट्र में SIR अभी जारी है। यहां अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम जल्दबाजी में न हटाया जाए।
मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के अधिकारियों को पहले दस्तावेज और जानकारी की पूरी जांच करने के बाद ही नाम हटाने का फैसला लेने को कहा गया है। नोटिस पाने वालों के लिए 3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे।
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 1.22 करोड़ रिकॉर्ड जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें करीब 62.48 लाख मामले रिश्तेदारों की जानकारी में गड़बड़ी और करीब 59.75 लाख मामले पिछली मतदाता सूची में रिश्तेदार से मैपिंग न होने से जुड़े हैं।
चुनाव आयोग ने कहा है कि पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए और उसका वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में फॉर्म-6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने और SIR से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम बदले बिना फॉर्म में नया हिस्सा जोड़ा गया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने बुधवार को SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 में से अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया था। अब SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी।


