तीन स्वदेशी वॉरशिप्स INS दूनागिरी, INS संशोधक और एंटी-सबमरीन INS अग्रय रविवार को भारतीय नौसेना में शामिल हुए। इन्हें देश में ही डिजाइन और बनाया गया है।
INS संशोधक एक बार में लगातार 12 हजार किलोमीटर तक जा सकता है। INS दूनागिरी 8 ब्रह्मोस मिसाइल्स से लैस है। वहीं, INS अग्रय भारतीय तटरेखा के पास मौजूद दुश्मन पनडुब्बियों को नष्ट कर सकता है।
इस दौरान कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। आज भारत रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार बनकर नहीं रहना चाहता। हमारी सैन्य शक्ति दुनिया के लिए बाजार नहीं बन सकती। हमारी शक्ति की पहचान विश्व का बाजार बनने में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता में है।
INS दूनागिरी प्रोजेक्ट-17A का 5वां स्टील्थ फ्रिगेट वॉरशिप है। इसे नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। प्रोडक्शन कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने किया है। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर (डिजाइनेट) कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा कि दूनागिरी ईस्ट नेवल कमान और ईस्टर्न फ्लीट का हिस्सा बनेगा।
INS संशोधक सर्वे वेसल (लार्ज) सीरीज का चौथा जहाज है। इसका काम युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि समुद्र का सर्वे करना है। इसे तट और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री डेटा कलेक्शन और डिफेंस-सिविल यूज के लिए बनाया गया है। बंदरगाहों और समंदर के रास्तों का सर्वे करना भी इसके मुख्य काम में शामिल है।
INS अग्रय अर्नाला क्लास का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी उथले पानी का वॉरशिप है। इसे हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और एडवांस्ड सोनार सिस्टम से लैस किया गया है। जिससे यह तटों पर तैनात दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निशाना बना सकता है।
भारतीय नौसेना के पास इस समय लगभग 140 से 145 सक्रिय वॉरशिप्स हैं। नौसेना का मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक अपने जहाजों की कुल संख्या को 150 से 160 तक पहुंचाना है।
भारत अपने इन युद्धपोतों को मुख्य रूप से तीन नौसैनिक कमांड्स और एक रणनीतिक द्वीप कमान में तैनात करता है। विशाखापट्टनम (पूर्वी कमान) के जहाज बंगाल की खाड़ी और मलक्का में चीन की घेराबंदी करते हैं।
मुंबई और कारवाड़ (पश्चिमी कमान) के युद्धपोत अरब सागर में पाकिस्तान पर नजर रखने और समुद्री लुटेरों से व्यापारिक जहाजों को बचाने के लिए चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। इसके अलावा, समंदर के बीचों-बीच अंडमान और निकोबार कमान में तैनात जहाज दुश्मन के प्रवेश मार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं।
आधुनिक नौसैनिक युद्ध में युद्धपोतों की भूमिका सबसे अहम हो चुकी है, क्योंकि दुनिया का 90% व्यापार समुद्री रास्तों से ही होता है। आज के युद्धपोत केवल जहाज नहीं, बल्कि समंदर में तैरते मिलिट्री बेस हैं।


