राहुल गांधी ने दिल्ली के इंदिरा भवन में छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज पर करीब 40 मिनट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने सबसे पहले अपने प्रेजेंटेशन में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च में शामिल छात्रों के वीडियो चलाए।
राहुल कहा कि सुरक्षाबलों ने छात्रों को बुरी तरह पीटा। ऐसा क्यों किया गया। नीट पेपर लीक से देश के 7.5 करोड़ स्टूडेंट्स और उनके परिवार इस घटना से प्रभावित हुए हैं। नीट मामले में किसी भी को सजा नहीं हुई।
राहुल ने कहा- जब पुलिसवाले मुझे हटाने आए तो उन्होंने मेरे कान में कहा सरकार को हटाइए। मुझे घसीटा तो मुंह से खून आया, दो-तीन पंच लगे, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को जाना होगा।
राहुल की दूसरी स्लाइड पेपर लीक के आंकड़ों से जुड़ी थी। राहुल ने कहा- अब तक 152 से ज्यादा पेपर लीक हुए हैं। जिससे 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए लेकिन पेपर लीक करने वालों को कोई सजा नहीं मिली।
राहुल ने कहा- 10 साल में 152 पेपर देश में लीक हुए हैं। इनमें किसी भी मामले में किसी को भी सजा नहीं मिली। 1.4 लाख करोड़ भारत सरकार का एजुकेशन बजट है। 1.32 लाख करोड़ भारतीय परिवार नीट एग्जाम पर खर्च करते हैं। NEET का खर्च देश के शिक्षा बजट से ज्यादा है।
राहुल ने प्रेजेंटेशन के दौरान चौथी स्लाइड दिखाई। जिसमें उन्होंने तीन डिमांड रखीं। पहली- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। दूसरी- छात्रों को पीटने वालों पर कार्रवाई हो। तीसरा- पीएम मोदी छात्रों से माफी मांगें।
पेपर लीक पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा जा रहा है। लेकिन 29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर उन्होंने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था।
इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।


