महेन्द्र शर्मा
बल्लभगढ़ प्रेस क्लब द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब,
श्री सियाराम हनुमान मंदिर में भक्ति का माहौल, महिलाओं की भव्य कलश यात्रा ने खींचा ध्यान,
बल्लभगढ़ के बाजारों में गूंजे जय श्री कृष्ण के जयकारे, श्रद्धालुओं ने की पुष्प वर्षा,
भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों के साथ निकली कलश यात्रा, श्रद्धालुओं ने किया स्वागत,
कथा व्यास बाबा बवंडर ने दिए भक्ति और सदाचार के संदेश,
फरीदाबाद। बल्लभगढ़ में रविवार को धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। बल्लभगढ़ प्रेस क्लब की ओर से श्री सियाराम हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया। 17 मई से 23 मई तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के पहले दिन निकाली गई कलश यात्रा में करीब 700 महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भागीदारी निभाई। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मुख्य बाजारों से होकर निकली कलश यात्रा
श्री सियाराम हनुमान मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा बल्लभगढ़ के प्रमुख बाजारों और विभिन्न गलियों से होकर दोबारा मंदिर परिसर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालु महिलाएं भक्ति गीतों पर नृत्य करती हुई आगे बढ़ रही थीं।
रास्ते में व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। कई स्थानों पर पानी और शरबत की छबील लगाकर श्रद्धालुओं की सेवा भी की गई। “राधे-राधे” और “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से पूरा क्षेत्र धार्मिक रंग में रंगा नजर आया।
कथा व्यास बाबा बवंडर ने दिए जीवन मूल्यों के संदेश
धार्मिक आयोजन में कथा व्यास महाराज बाबा बवंडर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मधुर वाणी और सदाचार का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हमेशा विनम्र और मधुर व्यवहार अपनाना चाहिए।
उन्होंने कौवे और कोयल का उदाहरण देते हुए कहा कि मीठी वाणी हर किसी को आकर्षित करती है, जबकि कठोर शब्द लोगों को दूर कर देते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने व्यवहार में प्रेम और सरलता बनाए रखने का संदेश दिया।
प्रभु भक्ति को बताया जीवन का आधार
बाबा बवंडर ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्रभु भक्ति और सत्संग के माध्यम से आत्मिक कल्याण प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण और भजन ही जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का श्रेष्ठ मार्ग है।
उन्होंने गुरु के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित सत्संग और भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
समिति सदस्यों ने संभाली व्यवस्थाएं
कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति के प्रधान अशोक जैन, महासचिव संदीप पाराशर, कोषाध्यक्ष श्याम सुंदर मित्तल, मुखी दीपक, गोपाल अरोड़ा, योगिंद्र चौहान, प्रेम, हेमलता सेनी, पूजा शर्मा, जोगिंदर गर्ग और अनिल गोयल सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया। धार्मिक आयोजन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।


