ईरान जंग शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो दुनियाभर में महंगाई भी बढ़ गई। इस दौरान अप्रैल से जून के बीच दुनिया की 6 सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड 81 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया। अल जजीरा की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
मुनाफे की यह रकम करीब 7.7 लाख करोड़ रुपए होती है, जो भारत के पूरे साल के रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।
जंग शुरू हुई तक कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल था। यह अप्रैल से जून के बीच 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यानी, तेल कंपनियों ने इस दौरान करीब 23% मुनाफा कमाया।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इजराइल के हमले कम होने के बाद लेबनान में युद्ध के कारण विस्थापित हुए 8 लाख से ज्यादा लोग अपने घर लौटने लगे हैं।
UN की मानवीय एजेंसी के मुताबिक, 30 जुलाई तक 8,21,077 लोग अपने इलाकों में वापस पहुंच चुके हैं। हालांकि, अब भी 3.6 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हैं, जिनमें करीब 26 हजार लोग सरकारी राहत शिविरों में रह रहे हैं।
ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका के हथियारों के भंडार को लेकर नई रिपोर्ट सामने आई है। CNN ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिकी सेना THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम के करीब 80% इंटरसेप्टर और पैट्रियट सिस्टम के लगभग आधे इंटरसेप्टर इस्तेमाल कर चुकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हथियारों का तेजी से घटता भंडार और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सहयोगी देशों पर ईरानी जवाबी हमले की आशंका, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान पर प्रस्तावित बड़े हमले को टालने की एक बड़ी वजह बनी।
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि देश पर लगे प्रतिबंधों से फायदा उठाने वाले कुछ लोग नहीं चाहते कि युद्ध और तनाव खत्म हो। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए युद्ध और अराजकता फायदे का सौदा है।
रूहानी ने यह भी कहा कि ईरान में एक दूसरा वर्ग ऐसा भी है, जो मानता है कि देश को अपनी विचारधारा पूरी दुनिया पर थोपनी चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसी सोच भी तनाव बढ़ाने का काम करती है।
रुबानी 2013 से 2021 तक राष्ट्रपति पद पर रहे। वे पश्चिमी देशों के साथ बातचीत के समर्थक थे। उनके कार्यकाल में 2015 का ईरान परमाणु समझौता (JCPOA) हुआ था।


