केंद्र सरकार ने खाने के तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटा दी है। इससे देश में खाना पकाने का तेल सस्ता हो सकता है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, नई दरें 24 सितंबर से लागू होंगी। सरकार ने क्रूड सोया और क्रूड पाम ऑयल पर शुल्क 10% से घटाकर 5% कर दिया है।
रिफाइंड सोया और रिफाइंड पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई है। क्रूड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10% से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर कस्टम ड्यूटी 32.5% से घटाकर 22.5% कर दी गई है।
इन कटौतियों से खाद्य तेलों की आयात लागत कम होने की उम्मीद है। इससे ग्राहकों को कीमतों में राहत मिल सकती है।
हालांकि, ग्राहकों को मिलने वाली राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि सप्लाई चेन में ड्यूटी कटौती का फायदा किस तरह आगे पहुंचाया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग (EC) से पूछा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा फैसला कब तक लेंगे।कोर्ट ने आयोग से कहा कि वह फैसले की टाइमलाइन बताए।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डी एस नायडू से विवाद पर अंतिम फैसला लेने की समयसीमा बताने को कहा। शिवसेना विवाद के फैसले में देरी का जिक्र करते हुए, कोर्ट ने कहा विवाद का निपटारा शीघ्रता से किया जाना चाहिए
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद EC ने नाम-सिंबल फ्रीज करने का फैसला लिया। जबकि यह फैसला जुलाई में ही लिया जा सकता था। आयोग ने जानबूझकर देरी की। इससे ममता बनर्जी के पास आयोग के आदेश को चुनौती देने का कोई रास्ता नहीं बचा।
चीफ जस्टिस ने कहा कि EC को मामले की सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अपने सबूत और दावे पेश करने का मौका दिया जाए। इसके बाद आयोग मामले पर फैसला ले।
बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव हैं। टीएमसी के दोनों गुटों ने असली नाम और सिंबल पर चुनाव लड़ने की मांग की थी। EC ने 17 सितंबर को ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं की सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया।
आयोग ने 18 सितंबर को ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न दिया, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है।


