कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि किसी भी नेता की पहली वफादारी देश के प्रति होनी चाहिए, पार्टी के प्रति नहीं। थरूर शनिवार को कोच्चि में ‘शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय विकास’ पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
थरूर ने कहा कि पार्टियां सिर्फ एक रास्ता हैं, देश को बेहतर बनाने का जरिया हैं। अगर देश ही नहीं बचेगा, तो पार्टियों का क्या फायदा? इसलिए जब देश की सुरक्षा का सवाल हो, तब सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा-
थरूर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की तारीफ की थी और ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार व सेना का समर्थन किया था। इसके बाद कांग्रेस पार्टी में उनके बयान को लेकर नाराजगी दिखी थी।
10 जुलाईः थरूर ने इमरजेंसी को काला अध्याय बताया
शशि थरूर ने 10 जुलाई को मलयालम भाषा के अखबार ‘दीपिका’ में प्रकाशित आर्टिकल लिखा था कि इमरजेंसी को सिर्फ भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में याद नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इससे सबक लेना जरूरी है। उन्होंने नसबंदी अभियान को मनमाना और क्रूर फैसला बताया।
उन्होंने लिखा था कि अनुशासन और व्यवस्था के लिए उठाए गए कदम कई बार ऐसी क्रूरता में बदल जाते हैं, जिन्हें किसी तरह उचित नहीं कहा जा सकता।
50 साल पहले 25 जून, 1975 को तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी। यह 21 मार्च, 1977 तक लागू रही थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने कई सख्त फैसले लिए थे।


