कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा, ‘केंद्र सरकार का ये कहना की पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, एक बेतुका कानूनी विरोधाभास है।’ उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार का फैसला भ्रम पैदा कर रहा है। इसने राजनीतिक बहस शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा, ‘हमेशा से पासपोर्ट को सबसे विश्वसनीय सरकारी पहचान दस्तावेज माना जाता रहा है। अगर पासपोर्ट से देश के भीतर नागरिकता साबित नहीं होती, तो फिर किस दस्तावेज से होगी।’
दरअसल, विदेश मंत्रालय ने 24 जून को जारी आदेश में कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है। इससे पहले SIR से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं।
मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा केंद्र और संबंधित सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। 2025 में शुरू हुए चिप आधारित ई-पासपोर्ट की अब तक 1.47 करोड़ प्रतियां जारी की जा चुकी हैं। आवेदन निपटाने का औसत समय घटकर 5-6 दिन रह गया है। 2019 के 16 देशों के मुकाबले अब 27 देश भारतीयों को वीजा-फ्री प्रवेश देते हैं।
नहीं। भारत कोई ऐसा एक दस्तावेज जारी नहीं करता है जो सभी नागरिकों के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाए। नागरिकता इस बात पर तय होती है कि इसे कैसे हासिल किया गया और नागरिकता कानून के तहत कौन से रिकॉर्ड मौजूद हैं।
1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना या री-इश्यू कराना महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने पासपोर्ट की फीस बढ़ाने का फैसला किया है।
36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपए से बढ़कर 2,500 रुपए हो जाएगी। वहीं, तत्काल पासपोर्ट के लिए अब 5,000 रुपए देने होंगे, जो पहले 3,500 रुपए थी।
60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस भी बढ़ाई गई है। इसकी सामान्य फीस 2,000 रुपए से बढ़कर 3,500 रुपए और तत्काल फीस 4,000 रुपए से बढ़कर 6,000 रुपए हो जाएगी।
मंत्रालय ने पासपोर्ट रूल्स, 1980 में संशोधन के बाद नई दरों को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। ये बढ़ोतरी 14 साल बाद की गई है। इससे पहले 2012 में फीस में बदलाव हुआ था।


