कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजन के 4 लोगों ने शुक्रवार को प्रेस 25 मिनट कॉन्फ्रेंस की।
उन्होंने कहा, 20 तारीख के बाद यही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का सच कुछ और ही है। हमला पुलिसवालों पर भी हुआ है।
मेरे पिता जंतर-मंतर पर बैरिकेड के पास तैनात थे। वे अक्सर कहते थे कि यह अब सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन नहीं रहा, इसमें असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं।
20 जुलाई को रात 10 बजे मेरे पिताजी को उनके साथी घर लेकर आए। उनकी वर्दी खून से लथपथ थी। हिंसक भीड़ ने उन्हें घसीटा और जंतर-मंतर मंच के पास पीट-पीटकर मारने की कोशिश की थी। वे करीब चार घंटे तक RML अस्पताल में बेहोश रहे, फिर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ही क्रिमिनल बताया गया।
20 जुलाई शाम 7 बजे पति को कॉल किया, तो वो हॉस्पिटल में इलाज करा रहे थे। भीड़ में मौजूद शरारती तत्वों ने पत्थर और हथियारों से पुलिस जवानों को घायल कर दिया था। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया।
रात 11 बजे जब पति घर आए, तो उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को तोड़ा गया और पुलिस फोर्स पर हमला किया गया। ड्यूटी के दौरान उन्हें मिला हेलमेट पूरी तरह टूट चुका था।
मेरे पिता ASI हैं। उन्हें बहादुरी के लिए 4 सम्मान मिल चुके हैं। मेरे दादाजी भी BSF में थे। 1971 की जंग लड़ चुके हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन में पिता फ्रंटलाइन पर तैनात थे। उनके साथी से पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोट लगी है।
जब उनकी तस्वीर देखी तो सिर मुंडा हुआ था और चार टांके लगे थे। मैं डर गया था। पिता ने बताया कि प्रदर्शन में सिर्फ छात्र नहीं थे, बल्कि हिंसक और उपद्रवी लोग भी शामिल थे।
CJP ने आरोप लगाया था कि 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च में और उसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट्स गन का इस्तेमाल किया। पार्टी ने कई छात्रों के घायल होने का दावा करते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।


