NEET पेपर लीक मामले में CBI ने सोमवार को कहा कि पुणे की एक मेडिकल एकेडमी में फिजिक्स फैकल्टी रहे हर्षदकुमार शाह ने क्वेश्चन पेपर अरेंज कराने में भूमिका निभाई थी। एजेंसी के मुताबिक, शाह ने फिजिक्स का प्रश्नपत्र मनीषा हवालदार तक पहुंचाया था। जांच में यही पेपर मनीषा के मोबाइल से बरामद हुआ।
इसी मामले में गिरफ्तार डॉ. मनोज शिरुरे, हर्षदकुमार शाह और मनीषा हवालदार को सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
CBI ने अदालत को बताया कि डॉ. मनोज शिरुरे पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने मुख्य आरोपी शिवराज मोटेगांवकर से 5 लाख रुपए लिए थे। यह रकम उनकी बहन के घर से बरामद की गई थी।
देशभर में 3 मई को NEET-UG परीक्षा हुई थी। 7 मई की शाम पेपर लीक की खबर सामने आई थी। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। 21 जून को री-एग्जाम होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NEET री-एग्जाम को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराने की मांग खारिज कर दी। री-एग्जाम पेन-पेपर मोड में ही होगी।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच RJD सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील ने NEET री-एग्जाम CBT मोड में कराने की मांग की।
इधर संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की स्थायी समिति की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने की। इसमें NEET परीक्षा, NTA और पेन-पेपर बनाम CBT मोड पर चर्चा हुई।
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने समिति ने कहा कि NEET से जुड़े सवाल केवल परीक्षा के तरीके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षा कराने वाली एजेंसी की विश्वसनीयता से भी जुड़े हैं। संगठन ने NTA को भंग कर संसद के कानून के तहत नई राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाने की मांग की।
UDF ने यह भी कहा कि NEET-UG 2026 पेपर लीक की जांच को 2024 की परीक्षा से जुड़े विवादों के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। संगठन ने पूरे मामले की समयबद्ध और पारदर्शी जांच की मांग की।


