दिल्ली के साकेत में 30 मई को हुए बिल्डिंग हादसे में नया खुलासा हुआ है। गिरफ्तार बिल्डिंग मालिक करमवीर ने पुलिस को बताया कि वह बिल्डिंग की चार मंजिलों से हर महीने करीब 10 लाख रुपये कमा रहा था। हर मंजिल करीब 2.5 लाख रुपये प्रति माह के किराए पर दी गई थी।
जांच में पता चला है कि बिल्डिंग गिरने के समय दो और मंजिलों का निर्माण चल रहा था। सूत्रों ने बताया कि करमवीर ने नए फ्लोर के बारे में खरीदारों और निवेशकों से पहले ही बात कर ली थी। जिनसे उसे हर महीने 5 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई होने की उम्मीद थी।
हालांकि नए फ्लोर बनने से पहले ही 30 मई को चार मंजिला इमारत ढह गई। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई थी। जिसके बाद पुलिस ने 71 साल के मकान मालिक करमवीर को अरेस्ट किया।
मंगलवार को मलबा हटाने के काम के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई बिजली के मीटर जब्त किए। जो करमवीर के नाम पर रजिस्टर्ड थे। इन्हें सबूत के तौर पर रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि ये मीटर मकान मालिक के खिलाफ अहम सबूत साबित होंगे।
पुलिस ने उन किराएदारों और रहने वालों से भी संपर्क करना शुरू कर दिया है। जिन्होंने बिल्डिंग में फ्लैट किराए पर लिए थे। कई लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, क्योंकि जांचकर्ता यह जानकारी जुटाना चाहते हैं कि निर्माण कब शुरू हुआ था, बिल्डिंग में कितने लोग रह रहे थे और क्या बिल्डिंग गिरने से पहले रहने वालों ने उसमें किसी तरह की कमजोरी के बारे में शिकायत की थी।
सूत्रों ने बताया कि पुलिस को अब तक इस बिल्डिंग का कोई एप्रूव्ड नक्शा नहीं मिल पाया है। अगर यह साबित हो जाता है कि बिल्डिंग का कोई नक्शा नहीं था या उसका निर्माण नियमों का उल्लंघन करके किया गया था। तो हादसो का जिम्मेदार सिर्फ मकान मालिक नहीं होगा। बल्कि उस बिल्डर को भी पकड़ा जाएगा जिसने यह बिल्डिंग बनाई।
इस बीच, फरार चल रहे बिल्डर मनीष का पता लगाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, उसकी आखिरी लोकेशन देहरादून में मिली थी, और उसे पकड़ने के लिए पुलिस की एक टीम वहां भेजी गई है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि मनीष की गिरफ्तारी से निर्माण प्रक्रिया, मंजूरियों और बिल्डिंग से जुड़े पैसों के लेन-देन के बारे में और भी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।


