मणिपुर के ट्रोंगलाओबी गांव में 7 अप्रैल को बम धमाके में 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई थी। दो भाई-बहनों का शव 24 दिन बाद भी इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मुर्दाघर में रखे हैं।
इस हमले का आरोप संदिग्ध कुकी उग्रवादियों पर लगाया गया। इन मासूम मौतों ने मणिपुर हिंसा के दर्द को कई गुना बढ़ा दिया है। भास्कर टीम गुरुवार को बच्चों के घर ट्रोंगलाओबी गांव पहुंची। खुले खेतों के पास बने घर में घुसते ही दीवार और आसपास मौजूद टिन की चादरों पर बम के छर्रों से हुए छेद दिल दहला देंगे।
जिस खिड़की पर बम फोड़ा गया था, उसकी मरम्मत करा दी गई है। लेकिन पूरा परिवार सदमे में है। बच्चों के 71 साल के दादा, बाबुटन ओइनाम कहते हैं- सरकार 10-10 लाख रुपए लेकर बच्चों का अंतिम संस्कार करने को कह रही है, लेकिन हमें पैसा नहीं चहिए। हमें हत्यारे चाहिए।
मणिपुर की भाजपा सरकार ने इस घटना की जांच एनआईए को सौंपी है। हैरानी वाली बात ये है कि शुरुआत में कुछ संदिग्ध कुकी उग्रवादियों को गिरफ्तार करने की खबरें आईं, लेकिन आरोपी कौन हैं, कहां के हैं, ऐसे कई सवालों पर सरकार और पुलिस चुप्पी साधे हुए है।
बाबुटन ने बताया कि सरकार जिन तीन लोगों को पकड़ने का दावा कर रही है, उनके बारे में लोग कह रहे हैं कि ये उग्रवादी पहले से जेल में बंद हैं। फिर पुलिस ने उन्हीं को दोबारा क्यों गिरफ्तार किया? इन्हीं झूठे दावों के चलते हम अपने बच्चों के शव अब तक घर नहीं लाए।
बाबुटन ओइनाम ने आगे कहा- हम तब तक अपने बच्चों का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे, जब तक उन्हें मारने वालों को सरकार गिरफ्तार कर सजा नहीं दे देती है। पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया, हमें नहीं पता। उन निर्दयी लोगों ने एक ऐसी नन्हीं बच्ची को मार डाला, जिसने जन्म के बाद अन्न का एक दाना भी नहीं चखा था।
बाबुटन कहते हैं कि गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम सिंह घटना के बाद हमारे घर पर आए थे। हमने उनसे दो टूक कहा था- हत्यारों को हमारे सामने सजा दो। सरकार हमसे कुछ छिपा रही है लेकिन हमें नहीं पता कि क्या?


