SIR के विरोध में मंगलवार को विपक्ष चुनाव आयोग तक सेव डेमोक्रेसी मार्च निकाल रहा था। पुलिस ने रास्ता रोका, बैरिकेड लगाए और नेताओं को बसों में बैठाकर प्रदर्शन खत्म कराने की तैयारी की। तभी तस्वीर बदल गई। राहुल-प्रियंका गांधी अचानक बस से उतरे गए और आकाशवाणी भवन के अंदर घुस गए।
दोनों परिसर के अंदर बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए और पुलिस के प्लान को फेल कर दिया। जो धरना कुछ घंटों में खत्म होने वाला था, वह शाम 8 बजे तक चला। पुलिस को कांग्रेसियों को हटाने में 8 घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया।
यहीं से कहानी पलटी। प्रियंका पहले से पुलिस की बस में बैठी थीं। राहुल भी बस में जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने प्रियंका से बात की और अचानक आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट की तरफ बढ़ गए। उनके पीछे इमरान प्रतापगढ़ी, केसी वेणुगोपाल, दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा, कुमारी शैलजा भी पीछे-पीछे आ गईं।
गेट पर राहुल को गार्ड ने रोका तो वह भड़क गए और धक्का देकर अंदर घुस गए। इसके बाद वहीं बरगद के पेड़ के नीचे प्रियंका के साथ धरने पर बैठ गए। राहुल के इस एक्शन की जानकारी कांग्रेसी नेताओं को नहीं थी।
पुलिस ने राहुल और प्रियंका से आकाशवाणी परिसर से हटने के लिए 3 से ज्यादा बार अपील की। दोपहर 12:30 बजे उनसे परिसर खाली करने को कहा।
राहुल ने जवाब दिया कि अगर उन्हें हटाना है, तो पहले यह बताया जाए कि वे विरोध करने के लिए कहां बैठ सकते हैं। करीब एक घंटे बाद फिर DCP सचिन शर्मा समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहुल-प्रियंका समेत नेताओं को वहां से हटाने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हुए।
राहुल ने NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पीएम आवास के पास धरना दिया था। तब भी प्रदर्शन इतना सीक्रेट रखा था कि पुलिस को भनक नहीं लगी।
राहुल ने खड़गे के जन्मदिन के बहाने विपक्षी सांसदों और नेताओं को उनके घर बुलाया था। सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया को यही लगा कि नेता केवल खड़गे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए जुटे हैं। बाद में पैदल मार्च कर पीएम आवास के नजदीक पहुंच गए थे।


