राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘मनुस्मृति’ बयान पर हंगामा हुआ। वे शैक्षणिक संस्थाओं पर RSS के दखल पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले बढ़ गए हैं, इससे शूद्र को पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया।
जेपी नड्डा ने टोकते हुए कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है। इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मनुस्मृति वाला बयान रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।
यह पूरी बहस पेपर लीक से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान हुई।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़ा बिल पेश किया। लोकसभा में बुधवार को करीब 7 घंटे बहस के बाद पेपर लीक से जुड़ा बिल पारित हुआ था।
सागरिका घोष ने कहा कि बच्चे सैकड़ों किलोमीटर दूर पढ़ने जाते हैं। परीक्षा का रद्द होना पढ़ने का अवसर नहीं, सरकार की विफलता है। 21 छात्रों ने जान दी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ। दिल्ली पुलिस के डीसीपी गृह मंत्री को रिपोर्ट करते हैं। गृह मंत्री को सदन में आकर बयान देना चाहिए।
खड़गे ने कहा कि जब जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, तब धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया? सरकार जो कहती है, उसका उल्टा करती है। अगर शिक्षा व्यवस्था नहीं बदली गई, तो कुछ दिनों बाद फिर पेपर लीक होगा। आपने पेपर लीक पर बिल तो ला दिया, लेकिन उसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था की, यह ज्यादा जरूरी है।
खड़गे ने कहा- प्रधानमंत्री कहते रहे कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी, लेकिन किसी को सजा नहीं मिली। 2024 के पेपर लीक के आरोपियों को क्लीन चिट मिल गई। नोटबंदी के समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर मैं विफल हो जाऊं तो मुझे चौराहे पर लटका देना। अब पेपर लीक के आरोपियों पर भी वैसी ही कार्रवाई करके दिखाइए।


