TMC बागी गुट के सांसद केंद्रीय मंत्री और बंगाल में भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक कर रहे हैं। बैठक में सांसद सायोनी घोष और प्रसून बनर्जी समेत कई TMC सांसद पहुंचे हैं। यहां भाजपा सांसद निशिकांत दुबे भी मौजूद हैं।
दिल्ली पहुंचते ही सायोनी ने कहा- मैं अभी कुछ नहीं कहूंगी। सही समय आने पर ही बोलूंगी। ममता ने सायोनी और माला को पार्टी के पदों से हटा दिया है। सायोनी पार्टी की यूथ विंग की अध्यक्ष थीं।
ममता बनर्जी की पार्टी TMC के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे। बागी गुट की सांसद काकोली घोष का दावा है कि उनके पास अब 22 सांसदों का समर्थन है। पहले काकोली ने 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया था। इसके बाद 19 सांसदों के साइन वाला एक लेटर भी सामने आया था।
TMC के कुल 28 लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा 13 राज्यसभा सांसदों में से 4 ने इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी है।
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस(TMC) में फूट उनकी हार के 14 दिन बाद ही शुरू हो गई थी। 4 मई को रिजल्ट आया था और बागी सांसदों ने 18 मई को ही लोकसभा स्पीकर को लेटर भेजा दिया और अलग गुट बनाने की मांग की थी।
इस चिठ्ठी में यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष और शताब्दी रॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। लिस्ट में 19 नाम थे, एक नाम सामने नहीं आया।
20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया।
30 जून 2022 को शिंदे भाजपा के समर्थन से सीएम बन गए। फिर दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया।
10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। स्पीकर ने विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दीं। इनकी सदस्यता भी रद्द नहीं की। इसी बीच, चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया।
टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं।
विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।


