भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। 15 जून की सैटेलाइट तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से से मानसूनी बादल गायब दिखाई दिए।
मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य 53.7 मिमी के मुकाबले सिर्फ 19.2 मिमी बारिश हुई। यानी बारिश में 64% की कमी दर्ज की गई है।
मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से 16 राज्यों में बारिश का इंतजार बढ़ गया है। इनमें राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं।
मानसून दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है। पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद यह बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रुक गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून के कमजोर होने की वजह समुद्र में नमी की कमी नहीं, बल्कि ऊपरी वायुमंडल की हवाओं का असामान्य पैटर्न है। इस बार पश्चिमी जेट स्ट्रीम सामान्य से ज्यादा दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मानसून को आगे बढ़ाने वाली हवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पर्याप्त नमी के बावजूद बादल नहीं बन पा रहे हैं। इससे मानसून के आगे बढ़ने पर फिलहाल ब्रेक लग सकती है। हालांकि अगले कुछ दिनों में इसके आगे बढ़ने की संभावना है। मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में प्री-मानसून बारिश जारी है।
महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 17 जून तक लू चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, मराठवाड़ा में 17 जून तक और विदर्भ में 16 जून तक हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है।
वहीं, महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और गोवा में 17 जून तक गर्मी के साथ उमस भरा मौसम रहने का अनुमान है। कोंकण और गोवा के कुछ इलाकों में 16 जून तक रात में भी गर्मी से बनी रहेगी।


