ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। सेना ने यह भी कहा कि यह अभियान अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहेगा। जयपुर में गुरुवार को भारतीय वायुसेना, नौसेना और थलसेना के सैन्य अभियानों के प्रमुख साउथ वेस्टर्न कमांड में जुटे।
यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सैन्य अभियान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। सेना की ओर से जानकारी दी गई कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के 100 से ज्यादा जवानों और टेररिस्ट कैंप में 100 से ज्यादा आतंकियों की मौत हुई है।
इस अभियान को पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ पिछले कई दशकों में भारत का सबसे व्यापक सैन्य अभियान बताया गया।
पहलगाम हमले में मारे गए हमारे भाई-बहनों को हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ऐसा हमला दोबारा न हो। हमारा ऑब्जेक्टिव क्लियर था और ऑपरेशन के लिए पूरी छूट दी गई थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल अवधेश कुमार और वाइस एडमिरल ए एन प्रमोद सहित सेना के कई अधिकारी मौजूद रहे।
जुबिन ए मिनवाला इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के डिप्टी चीफ (ऑपरेशन) राजीव घई डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन और डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, एयर मार्शल अवधेश कुमार डायरेक्ट जनरल एयर ऑपरेशन और वाइस एडमिरल ए एन प्रमोद डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशन हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना की तरफ से इन तीन ऑफिसर ने ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन और डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ राजीव घई ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि ‘आत्मनिर्भर’ केवल एक नारा नहीं है, बल्कि वास्तव में हमारी शक्ति को कई गुना बढ़ाने वाला है। आज हमारे 65% से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं। सेना उन्हीं हथियारों का उपयोग कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, अभी तो शुरुआत है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह संदेश दिया कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना अब सुरक्षित नहीं है।


