कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जाति जनगणना में जातियों के नाम दर्ज करने और डेटा जुटाने के तरीके का विरोध किया है।
उन्होंने पीएम मोदी को लेटर लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।
जनगणना के सवालों में पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं होने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इससे देश में ओबीसी आबादी का सही आंकड़ा सामने आने में परेशानी हो सकती है। तेलंगाना और बिहार जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग की है।
जाति का नाम पूछने के लिए सवाल रखने से एक ही जाति अलग-अलग नामों या उपजातियों के नाम से दर्ज हो सकती है। इससे जातियों की सही संख्या पता करना और आंकड़ों की तुलना करना मुश्किल होगा।
अगर एक ही जाति कई नामों से दर्ज हुई तो उसकी आबादी का आंकड़ा गलत हो सकता है। इसका असर पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं पर पड़ेगा।
जातियों की पहचान और संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया एक जैसी होनी चाहिए, ताकि देश में सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा मिल सके। जातियों के नाम दर्ज करने के लिए तय सूची या ड्रॉप-डाउन विकल्प देने की मांग की है।
इसमें सरकारी जाति सूचियों और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर नाम शामिल किए जा सकते हैं। तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी ऐसी सूचियों का इस्तेमाल किया गया था।
14 अगस्त को जनगणना-2027 में पूछे जाने वाले 40 सवालों की लिस्ट जारी की गई थी। लोगों से SC, ST या अन्य जाति के बारे में पूछा जाएगा।
आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब सभी समुदायों की जाति की जानकारी जनगणना में दर्ज की जाएगी।
इससे पहले 2011 की जनगणना के फॉर्म में 29 सवाल थे। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ SC/ST का विकल्प था।
जनगणना-2027 के सवालों की लिस्ट में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर है, जिसमें SC/ST के साथ जाति शब्द भी जोड़ा गया है।
खास बात यह है कि लोगों से कोविड वैक्सीन कहां लगवाई थी, यह सवाल भी पूछा जाएगा। इसके साथ मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी होंगे।
जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।
केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।


