दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक हुई। बैठक में 9 में से सिर्फ 3 लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे पहुंचे। पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर दिल्ली में होने वाली बैठक में मौजूद रहने का निर्देश दिया था।
बैठक में पहुंचे सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि जो सांसद नहीं आए पार्टी उनके खिलाफ नोटिस जारी करेगी। UBT के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि हमारे सांसदों को किडनैप किया गया है। जो बैठक में आएगा वो हमारे साथ है, जो नहीं आएगा वो गद्दार।
गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र पुलिस को 6 बागी सांसदों Y+ सिक्योरिटी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, 6 सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। उधर संजय राउत ने लगातार दूसरे दिन बागी सांसदों को गाली दी।
लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं।
इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा।
आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके।
मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में DMK को अगला लक्ष्य माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, मकसद दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन (850 सीटें करने), महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान करना है।
बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन समेत अहम बिलों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति बनाई है। चर्चा है कि TMC और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं।
इससे लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर भी परिसीमन बिल पारित कराया जा सकता है।
शिवसेना से पहले इसी साल AAP और TMC में टूट हो चुकी है। 24 अप्रैल को AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में विलय कर लिया था। वहीं, 16 जून को TMC ने NCPI में विलय कर NDA को समर्थन का ऐलान कर दिया था।


